बैंगलोर में हुई सामूहिक छेड़छाड़ की घटना के लिए कौन ज़िम्मेदार

Dheeraj Mishra

मंटो ने एक बार कहा था कि, “मुझे तहज़ीब, तमद्दुन(सभ्यता) और समाज के कपड़े उतारने की ज़रूरत नही है, यह समाज पहले से ही नंगा है।”

बैंगलोर में नए साल की रात को हुई छेड़छाड़ की शर्मनाक घटना और उसके बाद की प्रतिक्रियाए इस समाज के नंगेपन को उजागर करती हैं। ये कौन से लोग हैं जिन्हे कानून का ज़रा भी डर नही सताता है ।ऐसे लड़कों के इस आत्ममविश्वास के लिए कौन ज़िम्मेदार है? समाज, सरकार, प्रशासन या न्यायालय? सरकार और न्यायालयों द्वारा बनाए जा रहे कानून इनके मन में ख़ौफ क्यों पैदा नही कर पा रहे हैं? क्या इन्हे दिल्ली की निर्भया घटना से ज़रा भी दुख नही हुआ होगा? क्या इन लोगों की कोई लड़की दोस्त नही होगी।इस स्तर तक की संवेदनहीनता की शिक्षा इन्हे समाज के किस स्कूल से मिली है। सीसीटीवी फुटेज को देखकर ऐसा लगता नही है कि ये लोग ऐसा पहली बार कर रहे होंगे।

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One Body, One Mind, Two Identities

Team Project Sexuality

The current structure of society is as such that it is immensely difficult to reveal your true self. And, if one belongs to the LGBTQ+ community then life becomes harder as the level of acceptance is so low. However, there are many people from the community who are willing to come out and talk about their identities so as to start a conversation.

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Samantha Saxena identifies as a transgender gender fluid person

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Love in the time of ‘intolerance’: Religion no bar for this gay couple

Nikita Bishnoi

Since childhood, I have seen gay comical characters in movies and television series and they often were ridiculed. I often thought, do these people have a life other than being someone to be laughed upon? When I was to do a project, I knew, to explore the lives of gay people was exciting. My camera became an instrument to capture the life they lived.

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